आधुनिक भारत को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़कर ही आगे बढ़ना चाहिए: उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन

नई दिल्ली। भारत के उपराष्ट्रपति सीपी. राधाकृष्णन ने बुधवार को कर्नाटक के बीदर जिले के भालकी स्थित चन्नबसव आश्रम में हिरेमठ संस्थान के पूज्य डॉ. बसवलिंग पट्टादेवरु महास्वामीजी की 75वीं जयंती के अवसर पर आयोजित ‘अमृत महोत्सव’ समारोह में प्रमुख अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने आश्रम की पावन भूमि को अपनी उपस्थिति से गौरवान्वित किया और संत परंपरा के महत्व पर गहन चिंतन प्रस्तुत किया।
समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने डॉ. बसवलिंग पट्टादेवरु महास्वामीजी के जीवन और कार्यों की सराहना की। उन्होंने उन्हें करुणा, सेवा और समाज सुधार का जीवंत प्रतीक बताया। उपराष्ट्रपति ने कहा कि महास्वामीजी ने वर्षों से न केवल आध्यात्मिक क्षेत्र में योगदान दिया है, बल्कि सामाजिक सद्भाव और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका जीवन युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत है।
इस मौके पर उपराष्ट्रपति ने भगवान बसवन्ना की शिक्षाओं का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “पूजनीय संत भगवान बसवन्ना का जीवन समानता, करुणा और सच्चे धर्म की नींव पर टिका है। आज हमें उनकी शिक्षाओं से प्रेरणा लेकर एक ऐसे समाज का निर्माण करना चाहिए, जहां जाति, धर्म या वर्ग के आधार पर कोई भेदभाव न हो। बसवन्ना की वचन परंपरा आज भी प्रासंगिक है और हमें सामाजिक न्याय और मानवीय गरिमा के पथ पर अग्रसर होने की प्रेरणा देती है।”
उपराष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि आधुनिक भारत को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़कर ही आगे बढ़ना चाहिए। संतों और महात्माओं की परंपरा हमें सिखाती है कि सच्ची सेवा और करुणा ही राष्ट्र निर्माण का आधार है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे बसवन्ना जैसे महापुरुषों के आदर्शों को अपनाएं और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करें। समारोह में कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, कर्नाटक सरकार के वन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण मंत्री ईश्वर खंड्रे, नगर प्रशासन मंत्री रहीम खान सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी ने महास्वामीजी के योगदान को याद किया और समारोह को यादगार बनाने में योगदान दिया।