नई दिल्ली। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मंगलवार को घरेलू और औद्योगिक पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) आपूर्ति परियोजनाओं का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊर्जा आत्मनिर्भरता के विजन के अनुरूप राज्य में पीएनजी के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि आयातित एलपीजी पर निर्भरता कम की जा सके।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तहत मंगलदई और तेजपुर में घरेलू तथा औद्योगिक पीएनजी आपूर्ति परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, हिमंता बिस्वा सरमा ने लोक सेवा भवन से वर्चुअल माध्यम से इन परियोजनाओं और औद्योगिक पीएनजी कनेक्टिविटी का शुभारंभ किया।
पीएनजी परियोजनाओं के साथ ही मुख्यमंत्री ने उहानी और गोरैमारी में नई सीएनजी सुविधाओं का भी उद्घाटन किया। सरकार के मुताबिक, इन परियोजनाओं से घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और उद्योगों को स्वच्छ, भरोसेमंद तथा पर्यावरण-अनुकूल प्राकृतिक गैस की आपूर्ति सुनिश्चित होगी। इससे क्षेत्र में सतत विकास और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। ऐसे समय में असम सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप एलपीजी से पीएनजी की ओर लोगों को प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने कहा कि असम की रिफाइनरियां एलपीजी उत्पादन क्षमता को भी मजबूत कर रही हैं, जो राज्य के लिए गर्व की बात है।
हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि पीएनजी अवसंरचना के विस्तार से एलपीजी की खपत कम होगी, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत में मदद मिलेगी। उन्होंने असम को प्राकृतिक गैस के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की सरकार की योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए व्यापक स्तर पर पीएनजी कनेक्टिविटी विकसित की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएनजी सुविधाओं के विस्तार से असम के वायु गुणवत्ता सूचकांक में सुधार होगा और प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने विश्वास जताया कि पीएनजी और सीएनजी से जुड़ी नई परियोजनाएं ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।