नई दिल्ली। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने जिला आयुक्तों (District Commissioners) को निर्देश दिया है कि वे औपनिवेशिक प्रशासनिक मानसिकता का परित्याग करें तथा जन-सेवा में अनुशासन एवं कार्यकुशलता लाएं। उन्होंने जिला आयुक्तों के दो-दिवसीय सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए कहा कि चूंकि प्रौद्योगिकी और कत्रिम मेधा (AI) रोजमर्रा के कामकाज का अहम हिस्सा बन गए हैं, इसलिए अधिकारियों को प्रशासन के कामकाज में निजी क्षेत्र जैसा पेशेवर अंदाज लाना चाहिए।
यह सम्मेलन सोमवार आधी रात के बाद संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट किया, ‘‘आधी रात के कुछ ही समय बाद, हमने जोरहाट में जिला आयुक्तों के दो दिवसीय सम्मेलन का समापन किया। इसमें मंत्रियों, उपायुक्तों तथा 15 विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ 27 घंटे से अधिक समय तक गहन विचार-विमर्श किया गया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मेरा संदेश साफ था: हमारे जिला आयुक्तों को औपनिवेशिक प्रशासनिक मानसिकता से बाहर निकलना होगा तथा जन-सेवा में निजी क्षेत्र जैसा अनुशासन, कार्यकुशलता और पेशेवर अंदाज लाना होगा। रोजमर्रा के कामकाज और प्रशासन में प्रौद्योगिकी एवं कृत्रिम मेधा को अहम भूमिका निभानी होगी।’’
उन्होंने निर्देश दिया कि हर जिला आयुक्त विभागों के साथ बैठक करे ताकि यह पक्का किया जा सके कि हर निर्देश बिना किसी देरी के क्षेत्र स्तर के अधिकारियों तक पहुंचे और उस पर अमल हो। शर्मा ने कहा, ‘‘असम के जिलों को बेहतर प्रदर्शन के लिए आपस में प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए। मुझे उम्मीद है कि हर जिला आयुक्त अपने जिले को देश का सबसे अच्छा जिला बनाने की दिशा में काम करेगा।’’
सीएम बिस्वा ने कहा कि प्रशासन के रोजमर्रा के कामकाज को सरकार द्वारा किए जा रहे सुधारों के साथ तालमेल बिठाकर चलना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘इन चर्चाओं के साथ-साथ, मैंने 85 से ज़्यादा फाइलें मंजूर कीं तथा गणमान्य लोगों को 34 से ज़्यादा नोट एवं पत्र भी लिखे।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि इन चर्चाओं से ज़मीनी स्तर पर ठोस बदलाव देखने को मिलेंगे और ‘‘यही वह संकल्प है जिसके साथ हम जोरहाट से जा रहे हैं।’