रायपुर, मृत्युंजय निर्मलकर: हैदराबाद में सामने आए कथित MLM और डिजिटल मार्केटिंग फ्रॉड मामले को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर “ट्रेनिंग” और “रजिस्ट्रेशन” के नाम पर ₹199–₹299 जैसी राशि कैसे ली जा रही थी, जबकि डायरेक्ट सेलिंग गाइडलाइंस और कई कंपनियों की पॉलिसी में ट्रेनिंग को निशुल्क (Free) बताया गया है।
इसी बीच अब इस नेटवर्क का कनेक्शन छत्तीसगढ़ के बिलासपुर और रायपुर तक भी बताया जा रहा है, जहां बड़े स्तर पर enrollment, online meetings और training systems चलने की चर्चाएं हैं। सूत्रों के मुताबिक बिलासपुर और रायपुर में लंबे समय से office setup, calling systems, Zoom trainings और paid mentorship structure operate किए जा रहे थे। अब लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर यह गतिविधियां इतने समय से खुलेआम चल रही थीं, तो फिर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
आरोप है कि “Forever Living” के नाम और ब्रांड की आड़ में चल रहे “Achiever Club” नेटवर्क में लोगों को “वर्क फ्रॉम होम”, “ऑनलाइन इनकम” और लग्जरी लाइफस्टाइल का सपना दिखाकर जोड़ा जा रहा था। सोशल मीडिया पर बड़े इनकम स्क्रीनशॉट, विदेशी ट्रिप्स और महंगी गाड़ियों का प्रदर्शन कर युवाओं, छात्रों और गृहिणियों को आकर्षित किया जाता था।
सूत्रों के मुताबिक नए लोगों से “मेंटोरशिप”, “Zoom Training”, “System Access” और “Registration” के नाम पर ₹199 और ₹299 जैसी राशि ली जा रही थी। जबकि डायरेक्ट सेलिंग गाइडलाइंस के अनुसार किसी भी व्यक्ति को केवल नेटवर्क में जोड़ने या ट्रेनिंग देने के नाम पर अनिवार्य फीस लेना सवालों के घेरे में आता है। यही कारण है कि अब इस पूरे मॉडल की जांच की जा रही है।
बताया जा रहा है कि इस पूरे नेटवर्क का turnover और collection मिलाकर scam estimation करीब ₹600 करोड़ तक पहुंच सकता है, हालांकि इस आंकड़े की अभी तक किसी सरकारी एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच एजेंसियां अब transaction records, digital payments, online trainings, IDs और network chain की जांच में जुटी हुई हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर यह प्रक्रिया कंपनी पॉलिसी और गाइडलाइंस के खिलाफ थी, तो फिर इतने लंबे समय तक यह सिस्टम खुलकर कैसे चलता रहा? क्या कंपनी को इसकी जानकारी नहीं थी, या फिर लोकल स्तर पर अलग नेटवर्क बनाकर काम किया जा रहा था? यही बातें अब जांच एजेंसियों के रडार पर हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हैदराबाद में कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और कुछ आरोपी जेल में हैं। वहीं अब जांच एजेंसियां इस नेटवर्क के दूसरे राज्यों से जुड़े कनेक्शन भी खंगाल रही हैं।
लोग यह भी पूछ रहे हैं कि जिन offices में लगातार seminars, Zoom trainings और नए लोगों की joining कराई जा रही थी, वे अब तक कार्रवाई से बाहर कैसे हैं? क्या जांच अभी शुरुआती स्तर पर है, या फिर एजेंसियां पूरे नेटवर्क की chain तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं — इस पर अभी आधिकारिक रूप से कुछ स्पष्ट नहीं कहा गया है।
हालांकि “पुलिस को पैसे देकर बचने” जैसी बातों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सोशल मीडिया पर इसे लेकर चर्चाएं लगातार तेज हो रही हैं। जांच एजेंसियों की तरफ से फिलहाल ऐसी किसी बात की पुष्टि नहीं की गई है।
सूत्रों का दावा है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
कृपया जुड़े रहें।