रायपुर: राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (SFRTI) रायपुर के सरकारी कैंपस से बिना किसी आधिकारिक वर्किंग प्लान, सक्षम स्वीकृति (Approval), टेंडर प्रक्रिया या नीलामी के सैकड़ों सुबबूल के पेड़ काटकर ₹1500 प्रति ट्रैक्टर की दर से किसी निजी व्यक्ति को ले जाने दिए जा रहे हैं, तो यह पूरी तरह से गंभीर रूप से नियम विरुद्ध (Illegal) और वित्तीय अनियमितता का मामला है।
जब इसके बारे में वन अनुसंधान के प्रमुख अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने कहा ये परिसर में सुबबुल के पेड़ो की सामान्य साफ सफाई है । ये सुबबुल के पेड़ हमारे लिए केवल कचरा की तरह है खरपतवार है जो काफी तेजी से फैल जाते है जिसके तहत परिसर में हमने किसी भी को अपने खर्च में इसे काटकर ले जाने दिया है । उन्होंने तो ये भी कहा कि आप भी चाहे तो इन्हें काटकर ले जाए हमें कोई आपत्ति नहीं है। इससे ये बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये सुबबुल को काटकर कितने ट्रिप ट्रैक्टर से वह व्यक्ति बिना किसी रोक टोक के ले गया होगा । अब बिना किसी नोट किए अपने हिसाब से सैकड़ों पेड़ो की कटाई हो गई । हमने इस के बारे में जब लकड़ी ले जाने वाले से फोन में बात किया तो पता चला उन्होंने इसके लिए केवल आवेदन किया है जिसमें 1500 प्रति ट्रिप ट्रैक्टर में ले जाने की बात कही है। लेकिन संस्थान द्वारा कोई भी लिखित परमिशन उनके पास नहीं है। उन्होंने बताया हमने पाटले जी से बात की है जो संस्थान के सहायक अधिकारी है।
इस तरह से परिसर से पेड़ कटाई नियम विरुद्ध होने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. सरकारी परिसर और वन भूमि के कड़े नियम
भले ही सुबबूल निजी भूमि पर काटने के लिए मुक्त श्रेणी में आता हो, लेकिन सरकारी संस्थानों, वन विभाग के परिसरों या शासकीय भूमि पर लगे पेड़ों पर यह नियम लागू नहीं होता सरकारी कैंपस के पेड़ राज्य की संपत्ति होते हैं। उन्हें काटने के लिए संस्थान के प्रमुख द्वारा बकायदा एक प्रस्ताव (Proposal) बनाकर उच्च अधिकारियों से तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृति लेना अनिवार्य होता है।
2. टेंडर और नीलामी (Auction) का उल्लंघन
सरकारी संपत्ति या लकड़ियों को किसी निजी व्यक्ति को सीधे तय कीमत (जैसे ₹1500 प्रति ट्रैक्टर) पर नहीं बेचा जा सकता। इसके लिए वन विभाग के नियमों के तहत बकायदा खुली नीलामी (Public Auction) या ई-टेंडर (E-Tender) निकाला जाना जरूरी है, ताकि शासन को अधिकतम राजस्व मिल सके। बिना टेंडर के किसी को भी लकड़ी सौंपना सीधे तौर पर वित्तीय भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एक अपराध है।
3. जुलाई (वर्षा ऋतु) में कटाई पर रोक
जुलाई का महीना मानसून (वर्षा ऋतु) का समय होता है। छत्तीसगढ़ सहित देश के लगभग सभी राज्यों के वन नियमों के अनुसार, वर्षा ऋतु के दौरान (आमतौर पर 15 जून से 15 अक्टूबर तक) जंगलों या सरकारी परिसरों में हरे पेड़ों की कटाई और परिवहन पर पूरी तरह प्रतिबंध होता है, क्योंकि यह पौधों के बढ़ने और पर्यावरण के संवर्धन का समय होता है।
4. पारगमन पास (Transit Pass – TP) की अनिवार्यता
सैकड़ों पेड़ों की लकड़ी को ट्रैक्टरों में भरकर ले जाने के लिए वन विभाग द्वारा जारी वैध टी.पी. (परिवहन पास) की आवश्यकता होती है। बिना वैध टी.पी. के सरकारी परिसर से लकड़ी बाहर ले जाना ‘वन अपराध’ (Forest Offence) की श्रेणी में आता है।
इस मामले में त्वरित कानूनी कदम वन विभाग को लेनी चाहिए जिससे एक जिम्मेदारी तय हो। आखिर इस तरह से परिसर में कटाई और कब कब हुई है किसके कहने में की गई । आखिर वहाँ के रेंजर को क्या इसकी जानकारी नहीं है। और वे इस पर संज्ञान क्यों नहीं लेते है।
राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, छत्तीसगढ़ शासन वन विभाग का इकलौता अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान है ।
विगत दिवस संस्थान परिसर के लगभग 63 हेक्टेयर क्षेत्र में पूर्व के स्थापित वृक्ष प्रजातियां जिसमें शीशम, खैर , सागौन ,नीलगिरी ,नीम, बबूल लगे हुए हैं, जिसमें बीच-बीच में 40 से 60 सेंटीमीटर मोटाई के सू बबुल के वृक्ष जिसे विदेशी मूल का वीड कहते हैं के पेड़ काटे गए हैं। अनुसंधान के डायरेक्टर कौशलेंद्र कुमार जो कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक अधिकारी हैं उन्होंने बताया कि यह शु बबुल 63 हेक्टर क्षेत्र में फैल चुका है और अन्य प्रजातियों के वृद्धि को प्रभावित कर रहा है इसलिए उन्होंने तय किया कि इसे जो भी व्यक्ति चाहता है काटकर ले जाए अपने खर्चे पर । संस्थान को इससे कोई आपत्ति नहीं। संस्थान ने किसी एक व्यक्ति को काटने और ले जाने के अनुमति इस तरह से दी है कि वह ₹1500 रुपए जमा कर जितनी सूबबूल की लकड़ी चाहे खुद काटकर ले जा सकता है।
दूसरी ओर क्या किसी भी वृक्ष प्रजाति चाहे वह कोई भी प्रजाति हो बारिश के सीजन में काटना उचित है?
भारी बरसात के सीजन में जहां वृक्षारोपण किया जाते हैं वहां अनुसंधान संस्थान में वृक्षो की कटाई की जा रही है।
हमारे संवाददाता को संस्थान के अन्य संवेदनशील अधिकारियों से बात की गई जिसमें तीरथ राज साहू जी रेंज अफसर ने बताया कि यह एक विदेशी वीड है जिसे पहले भी काटा गया है परंतु इस संबंध में किसी भी प्रकार की कटाई की अनुमति अथवा परिवहन की अनुमति संबंधित कागजात नहीं दिखते।
रेंजर साहू ने बताया कि उपरोक्त कटाई कार्य निर्देशक के निर्देश में राजेंद्र पटले एवं मनोज कश्यप के द्वारा किया जा रहा है।
चूंकि मामला एक प्रतिष्ठित अनुसंधान संस्थान (SFRTI Raipur) के भीतर का है, आप इस अवैध कटाई को रोकने और जांच कराने के लिए उचित कदम उठाने की आवश्यकता है। ताकि इस पर जिम्मेदार पर कार्यवाही की जा सके।
इससे पहले भी SFRTI Raipur में परिसर में रखे चंदन की लकड़ी चोरों ने साफ कर दिया था । जिसकी जवाबदेही अभी तक साबित नहीं हुई है। इस पर कार्यवाही की जारी है। जो बहुत दिनों से जारी है जैसा संस्थान के प्रमुख ने बताया है।