रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बिलासपुर में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी और सेवाभूमि की जमीन हड़पने का मामला जोरदार तरीके से उठा। बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने आरोप लगाया कि एक ही कॉलोनाइजर ने नगर निगम और नगर एवं ग्राम निवेश विभाग के अधिकारियों से मिलीभगत कर बड़े पैमाने पर नियमों का उल्लंघन किया है। उन्होंने दोषी अफसरों और बिल्डर पर कार्रवाई की मांग की।
मामले पर जवाब देते हुए वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने जांच कमेटी गठित करने का आश्वासन दिया।
विधायक के सवाल के जवाब में मंत्री ने बताया कि 2023-24 से 4 फरवरी 2026 तक निर्मित कॉलोनियों और व्यावसायिक परिसरों को लेकर कुल 50 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इनमें 21 बुनियादी सुविधाओं के अभाव, 2 रेरा अनुमति नहीं लेने, 15 रकम वापसी, 11 अधिपत्य दिलाने और 1 क्षतिपूर्ति से जुड़ी हैं। इनमें से 28 मामलों में आदेश पारित किए जा चुके हैं, जबकि 22 शिकायतें प्रक्रियाधीन हैं।
विधायक सुशांत शुक्ला ने सदन में आरोप लगाया कि एक ही बिल्डर ने अलग-अलग संस्थानों के नाम पर करीब 100 एकड़ क्षेत्र में टाउनशिप एक्ट का उल्लंघन करते हुए निर्माण कराया। बिना वैध अनुमति टुकड़ों में ले-आउट पास कराए गए। सेवाभूमि और कोटवार को दी गई जमीन को ईडब्ल्यूएस के नाम पर पास कराने का भी आरोप लगाया गया। उन्होंने संबंधित बिल्डर की जमीन की खरीदी-बिक्री पर रोक लगाने की मांग की।
विधायक ने बिलासपुर के सरकंडा क्षेत्र के तीन खसरा नंबरों का उल्लेख करते हुए कहा कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की अनुमति के बिना नगर निगम ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अनुज्ञा जारी कर दी। उन्होंने उक्त अनुज्ञा निरस्त करने और जमीन की खरीदी-बिक्री पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
सदन में विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित अफसरों ने मंत्री को गलत जानकारी दी और विधानसभा में भ्रामक जवाब प्रस्तुत कराया। उन्होंने पूछा कि क्या ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इस पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि सभी दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं। विभागीय अधिकारियों, नगर एवं ग्राम निवेश और नगर निगम के अधिकारियों को शामिल कर जांच कमेटी गठित की जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
मामले के उठने के बाद सदन में कुछ समय तक तीखी बहस हुई और बिलासपुर में जमीन से जुड़े मामलों को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है।